न तो मंजिलें, न तो हमसफर

Friends: This is my inaugural Hindi/Urdu ghazal. It is possible that I have made some mistakes in grammer, spelling, etc. I would appreciate corrections. Also do comment on how you liked it.

 

न तो मंझिलें, न तो हमसफर

न तो मंझिलें, न तो हमसफर, हमें रास्तों कि तलाश है
युंही चल सकें किसी वास्तें, हमें फासलो कि तलाश है

चले थे लेके जिसे कभी, ये जलन है क्यों युं बुझी बुझी?
कुछ हसरतें, कुछ चाहतें, कुछ धड्कनों कि तलाश है

कुछ बात थी जो कही नहीं, कुछ बात थी जो सुनी नहीं
क्या बात है, हर बातमें, किन उलझनों कि तलाश है?

कभी पाससे, कभी दुरसे, कभी मिल लिये, कभी चल दिये
लगी अजनबीसी क्यों जिंदगी, किन वासतों कि तलाश है?

यहां हादसों से बुनी हुयी, है क्यों शख्स्-शखस कि जिंदगी
कहीं युं न हो, कि उसेभी तो, कुछ काफिरों कि तलाश है…

हिमांशु भट्ट … २००७

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7 Responses

  1. Wow! Great!

    Congratulations!

    Keep it up.

    Sangita

  2. कुछ बात थी जो कही नहीं, कुछ बात थी जो सुनी नहीं
    क्या बात है, हर बातमें, किन उलझनों कि तलाश है?

    कभी पाससे, कभी दुरसे, कभी मिल लिये, कभी चल दिये
    लगी अजनबीसी क्यों जिंदगी, किन वासतों कि तलाश है?

    very nice..

  3. બહુ જ સરસ લાગી. છેલ્લી લીટીમાં ‘કાફીર’ શબ્દ ન સમજાયો. આને કવ્વાલીની રીતે ગવાય તો ઓર મજા આવે.
    રસ્તાઓની તલાશની વાત અત્યંત ગમી.

  4. “Na to Manzile..”Reminds me of Lataji’s very old song..”Ye Dil Tum Bin..”Very nice.

  5. Good stuff! Enjoyed it… Keep writing.

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